Tuesday, 20 September 2016

जानिए क्यों कहते हे रावण को दशानंद


रावण भगवन शिव का बोहत बड़ा भक्त था . भगवन शिव  की तपष्या  किया करता था  उसने अपने सर की बलि दी .जिससे  भगवन शिव प्रशन होकर उसका सर वापस दे दिया  रावण ने फिर  अपना सर काट कर भगवन के चरणों में  रख दिया फिर शंकर भगवन ने उसका सर वापस दे दिया ऐसा रावण ने १० बार किया अंत में भगवन प्रशन होकर रावण के १० सर और आशीर्वाद दिया। ।
  तब से रावण दशानंद कहलाया।  

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