Sunday, 15 January 2017

पूर्ण आरती


ॐ शिव हरी शंकर गौरीशम
वन्दे गंगा धरनी शम
शिव रुद्रम पशुपति मिशानम
कलिहर काशी पुर नाथम
भज पर लोचन परमानंदा
नीलकंठ तुम शरणम्
भज असुर निकंदम भव दुःख भंजन
सेवक के प्रतिपाला

ॐ आवागमन मिटावो शंकर भज शिव बारम्बार
त्वमेव माता श्च पिता त्व्मेश
त्वमेव विध्या द्रवीडम त्वमेव
त्वमेव सर्व मम देव देवं
करारविन्देन पदार्विन्दम , मुखारविन्दे विनिवेश्यनतम
वत्स्य पत्रस्य पुट्टे स्यान , बाल मुकुन्दं मनसा स्मरामि
आव तो हरी ॐ बोलो जावे तो हरी ॐ बोलो
सुबह और शाम बोलो नेम से हरी ॐ बोले रे प्रेम से
हरी ॐ बोलो बोलो ॐ ॐ ॐ

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